Essay On Dussehra In Hindi For Class 7 | कक्षा 7 के लिए हिंदी में दशहरा पर निबंध |Dussehra 2018 |

Essay On Dussehra In Hindi For Class 7

कक्षा 7 के लिए हिंदी में दशहरा पर निबंध

Dussehra Images
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विजयदाशमी जिसे दशहरा या दशरा भी कहा जाता है, हर साल नवरात्रि के अंत में मनाया जाता है। यह उस वर्ष का समय है जब हम बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाते हैं। त्योहार अश्विन के हिंदू महीने में दसवें दिन मनाया जाता है, जो सितंबर या अक्टूबर के ग्रेगोरियन महीनों में पड़ता है।

Dasara Festival Story

त्यौहार भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग मनाया जाता है। महाराष्ट्र में, दिन शुभ माना जाता है और लोग नए घर या गैजेट खरीदते हैं। केरल में, विजयदाश्मी बच्चों को औपचारिक शिक्षा के लिए पेश किया जाता है। पश्चिम बंगाल में, देवी दुर्गा की छठी से दसवीं दिन पूजा की जाती है। दिल्ली में, रावण के विशाल effigies, उनके बेटे मेघनाद और उनके भाई कुंभकरन बुराई पर अच्छा संकेत जला है। तेलंगाना में, महिलाएं फूलुकम्मा नामक फूल रेंजोलिस बनाती हैं, जिसका अर्थ है कि देवी दुर्गा का स्वागत करने के लिए मां देवी जीवित आती हैं। मैसूर में देवी चामुंडेश्वरी की पूजा की जाती है। यहां उत्सव में हजारों रोशनी और सजाए गए हाथियों के साथ एक भव्य जुलूस शामिल है। पश्चिम बंगाल में, दुर्गा पूजा, नवरात्रि के छठे दिन शश्ती से शुरू होती है, और दसवें दिन विजयदाश्मी समाप्त होती है, जब देवी दुर्गा की मूर्तियों को जल निकायों में डुबोया जाता है।

Dussehra Essay in Hindi more than 400 Words

हिन्दुओं के अनेक पर्व-त्यौहार हैं जिनका किसी न किसी रूप में विशेष महत्त्व है। इन सभी पर्वों से हमें नवजीवन, उत्साह के साथ-साथ विशेष आनंद भी मिलता है। इन पर्वों से हम सच्चाई, आदर्श और नैतिकता की शिक्षा ग्रहण करते हैं। दशहरा भी एक ऐसा ही त्यौहार है जो सम्पूर्ण देश में बड़े ही जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है। दशहरा को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है। दशहरा का पर्व अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। कहा जाता है की महाशक्ति दुर्गा ने नौ दिन तक महिषासुर के साथ युद्ध किया और दसवें दिन अर्थात दशमी को उस पर विजय प्राप्त की।

Dasara Festival

इसीलिए इसे विजयादशमी भी कहते हैं। इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम रामचंद्र जी ने रावण पर विजय प्राप्त की थी। इस विजय के उपलक्ष्य में यह दिन आज भी दशहरा के रूप में मनाया जाता है। उत्तर-पूर्वी भारत में दशहरे का पर्व मुख्य रूप से राम-रावण के युद्ध से जुड़ा है। इसको मनाने के लिए जगह-जगह रामलीलाओं का आयोजन किया जाता है। नगर व कस्बों के प्रमुख बाजारों में श्रीराम के जीवन को चित्रित करने वाली झाँकियाँ निकाली जाती हैं। इस दिन रावण, कुम्भकर्ण एवं मेघनाद के पुतले जलाये जाते हैं। आस-पास के गाँवों व नगरों से हजारों लोग न्याय और सत्य के अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम राम की विजय और पाप, अधर्म और बुराई के प्रतीक रावण की हार देखने आते हैं। इस पर्व के दिन चारों ओर खूब चहल-पहल होती है। बाजारों में मेले जैसा दृश्य दिखाई पड़ता है।

Few Lines on Dussehra

सभी लोग परिवार के साथ मेले का आनंद लेते हैं। बंगाल में महाशक्ति दुर्गा के सम्मान और श्रद्धा में यह पर्व मनाया जाता है। वहाँ के जनमानस में यह धारणा है की इस दिन महाशक्ति दुर्गा कैलाश पर्वत प्रस्थान करती हैं। नवरात्र तक प्रायः प्रत्येक घर में दुर्गा माता की प्रतिमा सजा-धजा कर बड़ी श्रद्धा के साथ झाँकियाँ निकाली जाती हैं और रात्रि में भजन-कीर्तन होते हैं।क्षत्रिय लोग दशहरे के दिन अपने शास्त्रों का पूजन करते हैं। इस दिन राजा लोगों की सवारी बड़ी धूम-धाम से निकलती है। सभी लोग दशहरे की इस अवसर पर एक-दूसरे को बधाई देते हैं। वैश्य लोग इस  बहीखातों व बाँटों  करते हैं। इस दिन नीलकंठ का दर्शन भी अत्यंत शुभ माना जाता है। विजयादशमी का यह त्यौहार रावण पर राम की विजय का संदेश देता है। हमें निष्ठा और पवित्र भावना से इस पर्व को मनाना चाहिए। यह पर्व हमारे सामने राम का आदर्श चरित्र रखकर हमको यह प्रेरणा देता है की शत्रु एवं अत्याचारों को नष्ट कर देना च्चिए

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